4 घंटे की जद्दोजहद… भाषा बनी दीवार, लेकिन सागर पुलिस ने बुजुर्ग को परिवार से मिला दिया.
सागर। कभी-कभी इंसान अपने ही शहर में नहीं, बल्कि भाषा की दीवारों में खो जाता है। सामने मदद के लिए खड़े लोग होते हैं, लेकिन शब्द साथ नहीं देते। ऐसा ही एक भावुक कर देने वाला दृश्य शनिवार को सागर जिला अस्पताल में देखने को मिला, जहां एक बुजुर्ग घंटों से परेशान और बेसहारा भटक रहे थे। उनकी आंखों में अपने घर पहुंचने की बेचैनी थी, लेकिन वे केवल बंगाली भाषा जानते थे। आसपास मौजूद कोई भी उनकी बात समझ नहीं पा रहा था।
डायल-112 को जैसे ही इसकी सूचना मिली, एफआरवी तत्काल मौके पर पहुंची और बुजुर्ग को सुरक्षित थाना गोपालगंज ले जाया गया। थाना प्रभारी घनश्याम शर्मा ने स्वयं उनसे बातचीत कर उनकी पहचान जानने की कोशिश की, लेकिन भाषा सबसे बड़ी रुकावट बन गई। इसके बाद भी पुलिस ने हार नहीं मानी।
बुजुर्ग को पुलिस कंट्रोल रूम पहुंचाया गया, जहां सीसीटीवी शाखा और पुलिस टीम ने करीब चार घंटे तक लगातार धैर्य और संवेदनशीलता के साथ उनसे संवाद करने का प्रयास किया। हर शब्द, हर इशारे और चेहरे के हर भाव को समझने की कोशिश की गई। आखिरकार बातचीत के दौरान उनके मुंह से निकला एक शब्द—”शनि मंदिर”—पूरी कहानी बदल गया।
पुलिस ने शहर के विभिन्न सीसीटीवी कैमरों की मदद से शनि मंदिर क्षेत्र के दृश्य बुजुर्ग को दिखाए। जैसे ही उनकी नजर उस स्थान पर पड़ी, उनके चेहरे पर उम्मीद की चमक लौट आई। पुलिस समझ गई कि अब मंजिल दूर नहीं है।
तुरंत गोपालगंज थाना पुलिस बुजुर्ग को शनि मंदिर क्षेत्र लेकर पहुंची। वहां पहुंचते ही उन्होंने अपने घर का रास्ता बताना शुरू कर दिया। पुलिस उनके बताए रास्ते पर चलती रही और आखिरकार उस घर तक पहुंच गई, जहां पिछले चार घंटे से पूरा परिवार अपने बुजुर्ग की तलाश में परेशान था।
घर का दरवाजा खुला तो परिवार की आंखें नम हो गईं। आर्मी अस्पताल में कार्यरत परिजन अपने बुजुर्ग को सकुशल देखकर भावुक हो उठे। खुशी के आंसू और राहत भरी मुस्कान के साथ उन्होंने सागर पुलिस का दिल से धन्यवाद किया।
इस पूरे अभियान में डायल-112, थाना गोपालगंज, पुलिस कंट्रोल रूम और सीसीटीवी शाखा ने मिलकर यह साबित कर दिया कि पुलिस सिर्फ अपराधियों को पकड़ने का नाम नहीं, बल्कि मुश्किल में फंसे हर इंसान का सबसे बड़ा सहारा भी है।
भाषा अलग थी, पहचान नहीं थी, कोई सुराग नहीं था… लेकिन पुलिस के धैर्य, तकनीक और मानवीय संवेदनशीलता ने आखिरकार एक बिछड़े बुजुर्ग को उनके अपनों से मिला दिया। यह सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि इंसानियत की ऐसी मिसाल है, जिसने एक परिवार की खोई हुई मुस्कान वापस लौटा दी।
















