गांव में स्कूल खोलने का मकसद सिर्फ शिक्षा नहीं, बच्चों के भविष्य में बदलाव लाना है : कपिल मलैया
ग्राम मनेसिया में चार स्थानों पर पंचवटी रोपी, मंगलगिरी में 10 जगह होगा रोपण
सागर। आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर के अभियान ‘पंचवटी लगाओ, अपनी प्रकृति में स्थित हो जाओ’ के तहत विचार समिति 21 स्थानों पर पंचवटी का रोपण करेगी। इसी क्रम में बुधवार को ग्राम मनेसिया कलां स्थित विचार संस्कार विद्यालय परिसर में चार स्थानों पर पंचवटी लगाई गई। पंचवटी में बरगद, आम, औदुम्बर (गूलर), नीम और पीपल के पौधे शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान मियाजाकी आम और अगरवुड के पौधे भी लगाए गए। समिति के अनुसार आगामी दिनों में मंगलगिरी में 10 स्थानों पर पंचवटी का रोपण किया जाएगा।
विचार समिति अध्यक्ष कपिल मलैया ने बताया कि यह केवल शिक्षा का केंद्र ही नहीं बल्कि परिवर्तन केंद्र है। समिति का गांव में विद्यालय खोलने का उद्देश्य जरूरतमंद बच्चों को बेहतर शिक्षा का अवसर देना है। गांव में ही शिक्षा की अच्छी व्यवस्था होने से शहर की ओर पलायन भी रूकता है। हमारा प्रयास रोजगार उन्मुख शिक्षा देने का रहेगा जिससे स्थानीय रोजगार बढ़े। उन्होंने कहा कि स्कूल के माध्यम से ग्रामीण बच्चों को बेहतर शिक्षा, संस्कार और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना ही उनका लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि गांव के बच्चों को यदि सही मार्गदर्शन और सुविधाएं मिलें तो वे किसी भी स्तर पर शहरों के बच्चों से पीछे नहीं रहेंगे। साथ ही यह विद्यालय गांव के विकास में भी निरंतर प्रयास करेगा।
उज्जैन से आए आर्ट लिविंग के वरिष्ठ शिक्षक तेजवीर सिंह जी ने पंचवटी का महत्व बताया और आर्ट आफ लिविंग द्वारा ग्रामीण उत्थान के लिए प्रोजेक्ट भारत के बारे में भी जानकारी दी। इस प्रोजेक्ट भारत के द्वारा देश के सभी 7 लाख गांवों के स्वास्थ्य, स्वच्छता, शिक्षा, पर्यावरण एवं संस्कार सुधारने हेतु काम किया जा रहा है। पंचवटी में शामिल बरगद या वट को स्थिरता, अखंडता और दीर्घायु का प्रतीक माना जाता है। भारतीय परंपरा में वट-सावित्री जैसे पर्वों से इसका विशेष जुड़ाव है। आम को प्रेम, मिठास और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। इसके पत्तों और पल्लवों का उपयोग मांगलिक कार्यों में किया जाता है। औदुम्बर या गूलर का भी धार्मिक महत्व है और इसे भगवान दत्तात्रेय से जोड़ा जाता है। नीम को आरोग्य और स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है, जबकि पीपल भारतीय परंपरा में पवित्र वृक्षों में शामिल है।
कार्यक्रम में मप्र कुश समाज कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष प्रभुदयाल कुशवाहा ने कहा कि विचार समिति ने मनेसिया गांव में स्कूल खोलकर बच्चों के भविष्य को संवारने का जो काम किया है उससे बड़ा समाजसेवा का कार्य दूसरा नहीं हो सकता। आज के प्रतिस्पर्धी दौर में ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा और बेहतर अवसर मिलना बेहद जरूरी है। पंचवटी अभियान को प्रकृति संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए उन्होंने बच्चों के अनुशासन, संस्कार और शिक्षकों के प्रयासों की भी प्रशंसा की।
विचार समिति की कार्यकारी अध्यक्ष सुनीता अरिहंत ने बताया कि मनेसिया गांव में विचार संस्कार विद्यालय संचालित किया जा रहा है। एमपी बोर्ड से मान्यता प्राप्त इस विद्यालय में नर्सरी से कक्षा 5वीं तक पढ़ाई होती है। वर्तमान में 150 बच्चे शिक्षा ले रहे हैं।
विचार समिति के मार्गदर्शक शफीक खान ने बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन से निकले 14 रत्नों में कल्पवृक्ष भी शामिल था। इसके दर्शन के लिए लोग दूर-दूर जाते हैं। गांव में भी कल्पवृक्ष का पौधा लगाया गया है। कपिल मलैया जी ने अब तक 351 कल्पवृक्ष के पौधे विभिन्न स्थानों पर लगवा चुके हैं।
कार्यक्रम में सरपंच सुंदर सिंह ठाकुर, अमर सिंह राजपूत, अवधेश दुबे, मनोज राय, कुंदनलाल रिछारिया, मोहन चढ़ार, गजराज राजपूत आदि उपस्थित थे।
















