बंडा की दर्दनाक घटना के बाद सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज और जिला चिकित्सालय में मरीजों और उनके परिजनों की भीड़ बढ़ी है। ऐसे वक्त में प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बीच मानवीय संवेदना का एक प्रयास सामने आया है।।
निगमायुक्त राजकुमार खत्री ने जिला चिकित्सालय परिसर के आश्रय स्थल और दीनदयाल रसोई का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने आश्रय स्थल में पहुंचकर देखा कि दूर-दराज से इलाज के लिए आए मरीजों के परिजनों को रात गुजारने के लिए पलंग मिले…स्वच्छ चादर और तकिया मिले…टॉयलेट, रोशनी और जरूरी सुविधाएं ठीक रहें। क्योंकि अस्पताल में आने वाला हर परिवार इलाज के साथ-साथ एक और लड़ाई लड़ रहा होता है—चिंता, थकान और इंतजार की लड़ाई।
निगमायुक्त ने साफ कहा कि मरीज का परिजन रात में कुछ देर चैन से आराम कर सके. इसके लिए जरूरी सुविधाएं हमेशा दुरुस्त रहनी चाहिए।
दीनदयाल रसोई
और जब चिंता के बीच भूख दस्तक दे…तो कम से कम भोजन के लिए किसी को भटकना न पड़े। इसी सोच के साथ जिला चिकित्सालय की दीनदयाल रसोई में भोजन की गुणवत्ता भी परखी गई। दाल… चावल… रोटी और सब्जी, यानी जरूरतमंद के लिए सिर्फ खाना नहीं, मुश्किल समय में एक छोटी-सी राहत।
सिर्फ 5 रुपये में पौष्टिक भोजन की थाली उपलब्ध कराई जा रही है। लेकिन अब एक और अहम व्यवस्था की गई है।
बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज आने वाले मरीजों के परिजनों के लिए चलित दीनदयाल रसोई अब सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक मेडिकल कॉलेज परिसर में खड़ी रहेगी। ताकि दूर गांव से आया कोई परिवार…अपने मरीज को छोड़कर भोजन की तलाश में भटके नहीं। कुछ कदमों की यह सुविधा… शायद किसी प्रशासनिक फाइल में छोटी दिखाई दे… लेकिन उस परिवार के लिए बहुत बड़ी राहत हो सकती है, जिसका अपना अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा हो।
निगमायुक्त ने रसोई में साफ-सफाई, हाईजीन और बैठकर भोजन करने की व्यवस्था बेहतर करने के निर्देश दिए हैं।
क्योंकि सरकारी योजनाएं तब ज्यादा मायने रखती हैं…जब उनका फायदा उस इंसान तक पहुंचे, जो सबसे ज्यादा जरूरतमंद है।
बंडा की त्रासदी ने कई परिवारों को दर्द दिया है…और ऐसे वक्त में व्यवस्था की असली परीक्षा सिर्फ इंतजामों की नहीं—संवेदनशीलता की भी होती है। एक थाली भोजन की…एक साफ बिस्तर की…और कुछ पल के आराम की…कभी-कभी यही छोटी-सी मदद किसी टूटे हुए परिवार के लिए बहुत बड़ी इंसानियत बन जाती है।
















