अब सिविल लाइन नहीं, परशुराम चौराहा

सिविल लाइन से परशुराम चौराहे तक… सागर की पहचान में जुड़ा आस्था और संस्कृति का नया अध्याय

महापौर संगीता सुशील तिवारी की पहल से दशकों पुरानी मांग को मिली मंजिल, स्तंभ तैयार; फरसा-धनुष और शिलालेख देंगे चौराहे को विशिष्ट स्वरूप

सागर। शहर के प्रमुख सिविल लाइन चौराहे की पहचान अब नए नाम और नए स्वरूप के साथ सामने आने जा रही है। भगवान परशुराम के नाम पर चौराहे के नामकरण की दशकों पुरानी मांग को आगे बढ़ाते हुए नगर निगम स्तर पर पहल की गई और मेयर-इन-काउंसिल (एमआईसी) में प्रस्ताव को सर्वसम्मति से सहमति मिली। महापौर श्रीमती संगीता सुशील तिवारी के प्रयासों से शुरू हुई इस प्रक्रिया के बाद चौराहे पर परशुराम स्तंभ का निर्माण पूरा हो चुका है। अब यहां फरसा, धनुष और शिलालेख लगाए जाने की तैयारी है। दूसरी ओर, अटल पार्क में भगवान परशुराम की 35 फीट ऊंची प्रतिमा का निर्माण भी जारी है।

यह पहल केवल एक चौराहे के नाम में बदलाव तक सीमित नहीं है। इसके साथ शहर के सार्वजनिक स्थलों को धार्मिक-सांस्कृतिक प्रतीकों के माध्यम से विशिष्ट पहचान देने की कोशिश भी जुड़ी है। हालांकि, नामकरण की प्रशासनिक प्रक्रिया और उससे संबंधित औपचारिक अधिसूचना की स्थिति की पुष्टि अलग से की जानी चाहिए।

दशकों की मांग, एमआईसी की सहमति और जमीन पर उतरता प्रस्ताव

सिविल लाइन चौराहे का नाम भगवान परशुराम के नाम पर रखने की मांग ब्राह्मण समाज लंबे समय से उठाता रहा है। इसी क्रम में राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंस्था के प्रदेश अध्यक्ष दिनकर तिवारी के नेतृत्व में समाज के प्रतिनिधिमंडल ने महापौर संगीता सुशील तिवारी को ज्ञापन सौंपा था। इसमें चौराहे का नाम बदलकर परशुराम चौराहा करने की मांग रखी गई थी।

महापौर ने इस मांग को एमआईसी के समक्ष रखा, जहां प्रस्ताव पर सर्वसम्मति से सहमति बनने की बात सामने आई। इसके बाद चौराहे पर परशुराम स्तंभ का निर्माण कराया गया। अब इस स्थान को फरसा, धनुष और शिलालेखों से सुसज्जित करने की योजना है।

इस घटनाक्रम में समाज की लंबे समय से चली आ रही मांग, जनप्रतिनिधियों की पहल और नगर निगम की प्रक्रिया—तीनों की भूमिका दिखाई देती है।

स्तंभ तैयार, अब फरसा-धनुष से उभरेगा चौराहे का नया स्वरूप

परशुराम स्तंभ का निर्माण पूरा होने के बाद महापौर ने मौके पर पहुंचकर उसका निरीक्षण किया। प्रस्तावित फरसा, धनुष और शिलालेख चौराहे को धार्मिक-सांस्कृतिक स्वरूप प्रदान करेंगे। इन प्रतीकों के जरिए भगवान परशुराम से जुड़ी परंपरा और मान्यताओं को सार्वजनिक स्थल पर प्रदर्शित करने की योजना है।

वहीं, अटल पार्क में भगवान परशुराम की 35 फीट ऊंची प्रतिमा का निर्माण जारी है। प्रतिमा और चौराहे के विकास कार्य पूरे होने के बाद शहर में भगवान परशुराम से जुड़े दो प्रमुख स्थल सामने आएंगे।

सिर्फ नामकरण नहीं, शहर की सांस्कृतिक पहचान पर भी जोर

महापौर संगीता सुशील तिवारी ने कहा कि सागर के अन्य प्रमुख स्थलों को भी चिह्नित किया जा रहा है। उनका उद्देश्य शहर की ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक महत्व से जुड़े स्थानों को विशिष्ट पहचान दिलाना है।

इस बयान के साथ शहर के सार्वजनिक स्थलों के नामकरण और उनके सांस्कृतिक स्वरूप को लेकर नगर निगम की आगे की योजना भी चर्चा में है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चिह्नित किए जाने वाले अन्य स्थलों के लिए क्या प्रस्ताव सामने आते हैं और उन्हें किस प्रक्रिया के तहत लागू किया जाता है।

ब्राह्मण समाज ने जताया आभार

परशुराम चौराहे के नामकरण की पहल पर ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों ने महापौर के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रतिनिधियों ने इसे समाज की लंबे समय से उठाई जा रही मांग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। दिनकर तिवारी के नेतृत्व में ज्ञापन सौंपे जाने से लेकर एमआईसी में सहमति बनने तक की प्रक्रिया के बाद इस मांग को आगे बढ़ाया गया।

ये रहे उपस्थित

इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. सुशील तिवारी, एमआईसी सदस्य श्रीमती संगीता शैलेश जैन, श्रीमती कंचन सोमेश जड़िया, टप्पू चौबे, लालू तिवारी, बाटू दुबे, राकेश चौबे, सोमेश जड़िया, सुरेंद्र तिवारी, कृपाल सिंह, अनिल दुबे, अखिलेश शुक्ला, दिनकर तिवारी (प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय ब्राह्मण महासंस्था), प्रियंक दुबे, प्रज्ज्वल भारद्वाज, शैलेश जैन, अनुराग तिवारी और राजेश पराशर सहित समाज के अन्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे।