बिना आग के पका हुनर

सागर।

शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल किताबों के पन्नों तक सीमित रहना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करना भी है। इसी सोच को साकार करते हुए केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 4, सागर में व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत ‘बिना आग के खाना बनाना’ (Cooking Without Fire) गतिविधि का आयोजन किया गया।

कक्षा 6वीं ‘बी’ के विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता, पाक-कौशल और टीम भावना का ऐसा परिचय दिया, जिसमें स्वाद के साथ सीखने का संदेश भी शामिल रहा।

13 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस गतिविधि में विद्यार्थियों ने बिना गैस या चूल्हे का उपयोग किए सलाद, सैंडविच, भेलपुरी, फ्रूट चाट, अंकुरित दालों की चाट, स्मूदी और नींबू-पानी जैसे पौष्टिक एवं स्वादिष्ट व्यंजन तैयार किए। यह केवल भोजन बनाने का अभ्यास नहीं था, बल्कि सीमित संसाधनों में बेहतर परिणाम हासिल करने, स्वच्छता बनाए रखने और पोषण के महत्व को समझने की एक व्यावहारिक पहल भी रही।

जब कक्षा बनी प्रयोगशाला, और हुनर बना सीखने का माध्यम

इस गतिविधि की खासियत यह रही कि विद्यार्थियों को अपनी कल्पनाशीलता को व्यवहार में उतारने का अवसर मिला। भोजन की सजावट से लेकर सामग्री के संयोजन तक, बच्चों ने अपनी सूझबूझ और सहयोग की भावना का परिचय दिया। इस तरह की गतिविधियां विद्यार्थियों में आत्मनिर्भरता, अनुशासन, रचनात्मक सोच और सामूहिक कार्य करने की क्षमता विकसित करने में सहायक होती हैं।

विद्यालय के प्राचार्य श्री राजेंद्र वर्मा ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उत्साह और रचनात्मक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियां बच्चों में आत्मनिर्भरता, कार्य-कौशल, अनुशासन और टीम भावना को विकसित करती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को इसी तरह उत्साहपूर्वक सीखते रहने के लिए प्रेरित किया।

स्वस्थ भोजन की समझ, जीवनभर काम आने वाला ज्ञान

प्रशिक्षित कार्यानुभव शिक्षक श्री हेमराज नंदनवार ने विद्यार्थियों को स्वस्थ एवं संतुलित भोजन के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कम संसाधनों में पौष्टिक भोजन तैयार करने के लिए प्रेरित किया। गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान के साथ रचनात्मकता, सहयोग और स्वयं काम करने का अनुभव मिला।

शिक्षा में नवाचार की ऐसी पहलें क्यों हैं महत्वपूर्ण?

आज के दौर में शिक्षा का मूल्यांकन केवल परीक्षा परिणामों से नहीं, बल्कि इस बात से भी किया जाना चाहिए कि विद्यार्थी अपने ज्ञान का उपयोग वास्तविक जीवन में किस तरह कर पाते हैं। केंद्रीय विद्यालय क्रमांक 4 की यह गतिविधि इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम है। यह बच्चों को सिखाती है कि सीखने के अवसर हर जगह मौजूद हैं—बस जरूरत है उन्हें पहचानने और अपनी प्रतिभा को अवसर देने की।


कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार ने सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की। यह आयोजन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि जब शिक्षा में प्रयोग, अनुभव और प्रोत्साहन का मेल होता है, तब विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ता है और सीखने की प्रक्रिया अधिक सार्थक बनती है।