सिटी स्टेडियम में गूंजा जीवन बचाने का संदेश, आईएमए-आईएसए सागर ने कराया मेगा सीपीआर प्रशिक्षण
सागर, 16 सितंबर। अचानक हृदय गति रुकने की स्थिति में किसी की जान बचाने के लिए आम नागरिकों को सक्षम बनाने के उद्देश्य से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), सागर एवं इंडियन सोसाइटी ऑफ एनेस्थेसियोलॉजी (आईएसए), सागर के संयुक्त तत्वावधान में सिटी स्टेडियम में मैनिकिन आधारित मेगा सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) की वास्तविक तकनीक का व्यवहारिक प्रदर्शन कराया गया और उनसे स्वयं मैनिकिन पर अभ्यास भी कराया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को यह समझाना था कि कार्डियक अरेस्ट जैसी आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचने से पहले मिलने वाली शुरुआती मदद बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। सही समय पर सीपीआर शुरू करने से मरीज के महत्वपूर्ण अंगों, विशेषकर मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम के मुख्य प्रशिक्षक डॉ. अजय सिंह ने सीपीआर की पूरी प्रक्रिया का मैनिकिन पर प्रदर्शन किया।उन्होंने छाती पर दबाव देने की सही तकनीक, उसकी गति और स्थिति के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को एक-एक चरण समझाकर अभ्यास कराया गया, जिससे वे आपात स्थिति में घबराने के बजाय सही तरीके से प्रतिक्रिया दे सकें।
आईएमए सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने कहा कि अचानक कार्डियक अरेस्ट कभी भी और कहीं भी हो सकता है। ऐसे समय में मरीज के आसपास मौजूद व्यक्ति की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने बताया के कार्डियक अरेस्ट के बाद शुरुआती कुछ मिनट जीवन और मृत्यु के बीच निर्णायक हो सकते हैं। यदि आसपास मौजूद व्यक्ति सही तरीके से सीपीआर शुरू कर दे और जल्द से जल्द आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो जाए, तो मरीज के बचने की संभावना बेहतर हो सकती है।
डॉ. साद ने कहा कि सीपीआर का प्रशिक्षण केवल चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। स्कूल, कॉलेज, कार्यालय, खेल परिसर, सार्वजनिक स्थल और अन्य संस्थानों में अधिक से अधिक लोगों को यह जीवनरक्षक तकनीक सिखाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित नागरिक किसी आपात स्थिति में चिकित्सा दल के पहुंचने तक महत्वपूर्ण सहायता प्रदान कर सकते हैं।
कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने मैनिकिन पर सीपीआर का अभ्यास किया और प्रशिक्षण के दौरान अपनी शंकाओं का समाधान भी प्राप्त किया। आयोजकों ने कहा कि नियमित अभ्यास से सीपीआर देने में आत्मविश्वास बढ़ता है और वास्तविक आपात स्थिति में सही निर्णय लेने में मदद मिलती है।
कार्यक्रम की सफलता में डॉ. रजत जैन, डॉ. आनंद कुमार, डॉ. अभय सहित सपोर्ट स्टाफ रामजी कुर्मी एवं तरुण ठाकुर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सिंहस्थ गरबा अकैडमी से लकी ठाकुर का भी आयोजन में विशेष सहयोग रहा।
आईएमए और आईएसए सागर ने बताया कि यह कार्यक्रम उनकी व्यापक जनजागरूकता मुहिम का हिस्सा है। दोनों संस्थाओं का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों, कार्यालयों, स्कूलों, कॉलेजों और अन्य संस्थानों में सीपीआर प्रशिक्षण को बढ़ावा देना है, ताकि अधिक से अधिक लोग कार्डियक अरेस्ट जैसी आपात स्थिति में शुरुआती जीवनरक्षक सहायता दे सकें।
संस्था ने भविष्य में भी सागर के विभिन्न सार्वजनिक और शैक्षणिक स्थलों पर ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम जारी रखने की बात कही।
















