ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के साकार संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा की 57वीं पुण्यतिथि पर रविवार को न्यू प्रभाकर नगर सेवाकेंद्र पर विश्व शांति दिवस के रूप में मनाई गई। पुष्पांजली कार्यक्रम में जिलेभर से आए ब्रह्माकुमार भाई-बहनों ने बाबा को पुष्पांजली अर्पित कर उनकी शिक्षाओं को याद किया।
कार्यक्रम में सागर क्षेत्र की निदेशिका बीके छाया दीदी ने कहा कि नारी नरक का द्वार नहीं सिर का ताज है, नारी अबला नहीं सबला है, वह तो शक्ति स्वरूपा है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और नारी के उत्थान के संकल्प के साथ उसे समाज में खोया सम्मान दिलाने, भारत माता, वंदे मातरम् की गाथा को सही अर्थों में चरितार्थ करने वर्ष 1937 में उस जमाने के हीरे-जवाहरात के प्रसिद्ध व्यापारी दादा लेखराज कृपलानी (ब्रह्मा बाबा) ने परिवर्तन की नींव रखी। ब्रह्मा बाबा को ध्यान में परमात्म अनुभूति होने पर संसार से वैराग्य आ गया था।
दीदी ने कहा कि नारी उत्थान को लेकर ब्रह्मा बाबा का दृढ़ संकल्प ही था कि उन्होंने अपनी सारी जमीन-जायजाद बेचकर एक ट्रस्ट बनाया और उसमें संचालन की जिम्मेदारी नारियों को सौंप दी। इतने बड़े त्याग के बाद भी खुद को कभी आगे नहीं रखा। लोगों में परिवारवाद का संदेश न जाए इसलिए बेटी तक को संचालन समिति में नहीं रखा। 18 जनवरी 1969 को 93 वर्ष की आयु में बाबा ने संपूर्णता की स्थिति प्राप्त कर अव्यक्त हो गए थे। लेकिन उन्होंने अपने जीवन में जो मिसाल पेश की उसे आज भी लाखों लोग अनुसरण करते हुए राजयोग के पथ पर आगे बढ़ते जा रहे हैं। संस्थान की मुख्य शिक्षा और नारा है- स्व परिवर्तन से विश्व परिवर्तन और नैतिक मूल्यों की पुनस्र्थापना।
फिर कभी जीवन में पैसों को हाथ नहीं लगाया
बीके छाया दीदी ने कहा कि ब्रह्मा बाबा ने माताओं-बहनों को जिम्मेदारी सौंपकर खुद कभी पैसों को हाथ नहीं लगाया। यहां तक कि उनमें इतना निर्माण भाव था कि खुद के लिए भी कभी पैसे की जरूरत पड़ती तो बहनों से मांगते थे। बाबा कहते थे कि नारी ही एक दिन दुनिया के उद्धार और सृष्टि परिवर्तन के कार्य में अग्रणी भूमिका निभाएगी।
इस मौके पर बीके नीलम दीदी, बीके सीता दीदी, बीके लक्ष्मी दीदी, बीके संध्या दीदी,बीके दीपू दीदी, बीके खुशबू दीदी सहित सागर क्षेत्र की सभी ब्रह्माकुमारी बहनें मौजूद रहीं।
समापन पर ब्रह्माभोजन का आयोजन किया गया। ब्रह्मा बाबा को याद कर उनकी विशेषताओं को छोटे छोटे बच्चों ने डांस के माध्यम से सभी के बीच में रखा।
















