ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के समाजसेवा प्रभाग द्वारा चलाए जा रहे देशव्यापी संगम: गौरवपूर्ण वृद्धावस्था एवं सम्मानित जीवन अभियान के तहत सागर सेवाकेंद्र द्वारा शुक्रवार को “आनंद” वृद्धाश्रम में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मौजूद सभी वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान कर उन्हें जीवन के सुखदाई पक्षों के बारे में बताया गया।
कार्यक्रम में सागर क्षेत्र की निदेशिका बीके छाया दीदी ने कहा कि हमारे बुजुर्ग दुआओं का अथाह सागर हैं। उनके हृदय से निकली दुआएं सोने-चांदी से भी अधिक मूल्यवान होती हैं। वे छायादार वृक्षों के समान हैं, ऐसे वृक्षों को क्षति पहुंचाना स्वयं को कमजोर करना है। बुजुर्गों के साथ समय बिताना अत्यंत लाभकारी होता है। मेरा सभी वरिष्ठ नागरिकों से यही आग्रह है कि रोजाना आप सभी मेडिटेशन जरूर करें। इससे मन को शांति मिलेगी और दुख-दर्द, कष्ट का एहसास नहीं होगा। जीवन में जो हुआ उन बातों को भुलाकर वर्तमान का पूरा आनंद लें और एक-दूसरे के सहयोग से जीवन को खुशनुमा बनाएं।
बता दें कि भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और ब्रह्माकुमारीज़ के समाजसेवा प्रभाग के बीच हुए एमओयू के अंतर्गत संगम: गौरवपूर्ण वृद्धावस्था एवं सम्मानित जीवन अभियान पूरे देश में चलाया जा रहा है। इसके तहत स्कूल-कॉलेजों में कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं और विद्यार्थियों को घर के बड़े बुजुर्गों का सम्मान करने, उनके अनुभवों को लाभ लेने की सीख दी जा रही है।
समाज और संस्कृति के संरक्षक हैं बुजुर्ग
बीके लक्ष्मी दीदी ने कहा कि आप सभी तो समाज की धरोहर हैं। आपका जीवन अनेक अच्छे-बुरे अनुभवों की खान है। आप सभी के बीच आकर आज बहुत ही गर्व की अनुभूति हो रही है। आप सभी तो हमारी शान हैं। समाज और संस्कृति के संरक्षक हैं। इसलिए अपने आप को कभी कमजोर और अकेला महसूस नहीं करें। खुद को सदा परमात्मा की छत्रछाया में महसूस करें।
बीके खुशबू दीदी ने कहा कि घर में बड़े-बुजुर्गों की छांव मिलना ही भाग्य की बात है।
बच्चों को बुजुर्गों का सम्मान करने की सीख देने की जरूरत
संयुक्त संचालक डीएस यादव ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान समाज के लिए बहुत उपयोगी है। आज जो यहाँ आयोजन हुआ है उससे निश्चित ही है की आप सभी अपने को एक परिवार के रूप में देखेंगे।आज युवा पीढ़ी और बच्चों को घर के बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करने की सीख, उनके अनुभव का लाभ लेने की सीख देने की बहुत जरूरत है।
सेवानिवृत्त मेजर गजराज सिंह ने कहा कि वृद्धावस्था में यदि हम अपने आगे के शेष जीवन का आनंद लेना चाहते हैं तो जीवन के पुराने कड़वे अनुभवों को भूलना होगा। भले हमारे घर के सगे-संबंधियों ने हमें ठुकराया है लेकिन परमात्मा पिता बनकर सदा आप सभी के साथ हैं। इसलिए वर्तमान को आनंदमय बनाएं।
बृजमोहन केशरवानी ने कहा कि मैं पिछले 13 साल से ब्रह्माकुमारीज़ से जुड़कर राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कर रहा हूं। इससे मेरा पूरा जीवन ही बदल गया है। खान-पान सुधर गया। सोच सकारात्मक हो गई। मन सशक्त होने से छोटी-मोटी बातों में डिस्टर्ब नहीं होता है।
मीरा सोनी माता जी ने परमात्मा के साथ के अनेक अनुभवों को साझा किया माता जी ने कहा की हमने अपने आत्मा के पिता परमात्मा से बेटे का सम्बन्ध जोड़ा है और परमात्मा हमेशा अपने सम्बन्ध को निभाता है।
ब्रह्माकुमार मुकेश भाई ने सभी को बताया कि ताली एक हाथ से नहीं बजती अर्थात आज अगर आप सब यहाँ है तो कही ना कही आपकी भी गलती होगी तो इसका मतलब है कि हमें भी बदलने कि जरुरत है। तो हम खुद पर ध्यान दे और अपनी बात परमात्मा से करे उन्हें अपने दिल का हाल सुनाएँ किसी से कोई शिकायत नहीं करें बल्कि सबको दिल से दुआएँ दे जो हम देंगे वही मिलेगा।इस मौके पर केयरटेकर इजहार अहमद सहित सभी प्रबंधन समिति सदस्य एवं वृद्धाश्रम के वरिष्ठ नागरिक मौजूद रहे।
साथ ही राजयोग का अभ्यास कराया गया। सभी वृद्धजन को प्रसाद भी बांटा गया।
















