सागर में डॉक्टरों के संगठन इंडियन मेडिकल एसोसिएशन यानी IMA की शाखा ने वर्ष 2025-26 के दौरान स्वास्थ्य जागरूकता से लेकर चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने तक कई पहल की हैं।
IMA सागर की उपलब्धियों का दस्तावेज सामने है। इसमें 73 प्रमुख गतिविधियों का जिक्र है। कहीं कैंसर और टीबी की स्क्रीनिंग, कहीं रक्तदान, कहीं CPR का प्रशिक्षण, तो कहीं बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के चिकित्सा विभागों को उपकरणों का दान।
▪️बीमारी के इलाज से पहले, जागरूकता की लड़ाई
IMA सागर की गतिविधियों पर नजर डालें तो एक बड़ा हिस्सा बीमारियों की पहचान और बचाव के प्रति जागरूकता से जुड़ा दिखाई देता है।
कैंसर जागरूकता एवं स्क्रीनिंग शिविर, टीबी की जांच, मधुमेह के प्रति जागरूकता, एनीमिया की रोकथाम, थायराइड के लक्षणों की पहचान और आंखों की बीमारियों को लेकर अभियान चलाए गए।
खुरई में निमोनिया, बंडा में मधुमेह, रहली में COPD यानी फेफड़ों की एक गंभीर बीमारी, सिहोरा और देवरी में टीबी तथा जैसीनगर में कैंसर जागरूकता एवं स्क्रीनिंग जैसी गतिविधियां दर्ज हैं।
यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बीमारी का पता देर से चलना कई बार इलाज को मुश्किल बना देता है। दूसरी ओर, समय पर जांच और चिकित्सकीय परामर्श मरीज को सही दिशा में आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं।
लेकिन जनहित का अगला सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है—क्या इन शिविरों में जांच कराने वाले मरीजों को जरूरत पड़ने पर आगे का इलाज, विशेषज्ञ परामर्श और नियमित फॉलोअप भी मिल रहा है?
यही वह बिंदु है जहां जागरूकता अभियान का वास्तविक असर सामने आता है।
▪️CPR का प्रशिक्षण… संकट की घड़ी में जिंदगी बचाने की तैयारी!
हार्ट अटैक या अचानक कार्डियक अरेस्ट जैसी आपात स्थितियों में शुरुआती मिनट बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं।IMA सागर ने स्कूलों, कॉलेजों, NCC कैडेट्स, जिला न्यायालय परिसर, सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज और अन्य स्थानों पर CPR तथा आपातकालीन सहायता का प्रशिक्षण आयोजित किया। यह पहल केवल डॉक्टरों तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य आम लोगों को भी आपात स्थिति में सही प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करना है।
जरा सोचिए, किसी सार्वजनिक स्थान पर अचानक कोई व्यक्ति बेहोश होकर गिर पड़े। अगर वहां मौजूद लोगों को CPR का सही प्रशिक्षण मिला हो और वे आपातकालीन चिकित्सा सहायता बुलाने में सक्षम हों, तो मरीज की मदद जल्दी शुरू हो सकती है। यानी चिकित्सा का मतलब सिर्फ अस्पताल में इलाज करना नहीं, बल्कि अस्पताल पहुंचने से पहले भी जिंदगी बचाने की तैयारी करना है।
हालांकि, प्रशिक्षण कार्यक्रमों की वास्तविक पहुंच और कितने लोग व्यावहारिक रूप से प्रशिक्षित हुए, इसका आंकड़ा भी सामने आना चाहिए। इससे इन पहलों के असर का बेहतर आकलन हो सकेगा।
▪️सरकारी मेडिकल कॉलेज को उपकरण… मरीजों के लिए क्यों अहम?
स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सिर्फ डॉक्टरों की विशेषज्ञता से तय नहीं होती। आधुनिक उपकरण, प्रशिक्षित स्टाफ और समय पर जांच की सुविधा भी उतनी ही जरूरी हैं।
IMA सागर की रिपोर्ट में बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के ENT यानी नाक-कान-गला विभाग को FESS सर्जरी से संबंधित उपकरण देने और सर्जरी विभाग को उपकरण उपलब्ध कराने का उल्लेख है। इसके अलावा, मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग को गोनियोस्कोप देने की गतिविधि भी दर्ज है।
यह ऐसी पहल है जिसका महत्व सीधे चिकित्सा सुविधाओं से जुड़ सकता है। बेहतर उपकरणों की उपलब्धता से संबंधित विभागों की जांच और उपचार संबंधी क्षमता को मजबूती मिल सकती है। लेकिन यहां भी एक महत्वपूर्ण सवाल है—क्या इन उपकरणों का नियमित उपयोग हो रहा है? क्या मरीजों को पहले से बेहतर सुविधा मिल रही है? और क्या इनसे जांच या इलाज के लिए मरीजों को दूसरी जगह जाने की जरूरत कम हुई है?
इन सवालों के जवाब सामने आएं तो यह उपलब्धि मरीजों के लिए और अधिक अर्थपूर्ण बन सकती है।
▪️रक्तदान से लेकर टीबी मुक्त भारत तक… जनस्वास्थ्य पर फोकस!
IMA सागर की रिपोर्ट में स्वैच्छिक रक्तदान शिविरों का भी उल्लेख है। डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, रहली और बंडा सहित विभिन्न स्थानों पर रक्तदान गतिविधियां आयोजित की गईं। रिपोर्ट में रहली के एक शिविर में 52 यूनिट और बंडा के एक शिविर में 36 यूनिट रक्त संग्रह का उल्लेख है। यानी इन दो शिविरों में दर्ज आंकड़ों के अनुसार कुल 88 यूनिट रक्त संग्रह हुआ। यह केवल इन दोनों शिविरों का योग है, पूरे वर्ष का कुल आंकड़ा नहीं। रिपोर्ट में टीबी जागरूकता और स्क्रीनिंग अभियान के साथ केंद्रीय जेल, सागर में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत कार्यक्रम का भी उल्लेख है।
इसके अतिरिक्त महिलाओं के स्वास्थ्य, एनीमिया, सुरक्षित मातृत्व, स्तनपान, पोषण, बुजुर्गों के स्वास्थ्य और मानसून में फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम से जुड़े अभियान भी दर्ज हैं। ये गतिविधियां बताती हैं कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की चुनौती को केवल एक बीमारी तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। समाज के अलग-अलग वर्गों तक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सेवाएं पहुंचाना भी जरूरी है।
▪️डॉक्टरों के अधिकार बनाम मरीजों के अधिकार… संतुलन जरूरी!
IMA सागर की गतिविधियों में डॉक्टरों की सुरक्षा और कानूनी अधिकारों से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं। संगठन ने चिकित्सकों के खिलाफ हिंसा के विरोध में प्रदर्शन और मेडिको-लीगल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। मृत शरीर की गरिमा से संबंधित कानून की मांग को लेकर ज्ञापन देने तथा Coldrif सिरप मामले में डॉक्टरों के अधिकारों से जुड़ी पहल का भी रिपोर्ट में उल्लेख है। यह मुद्दा भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि डॉक्टरों को सुरक्षित वातावरण में काम करने का अवसर मिलना चाहिए। हिंसा और धमकी का माहौल चिकित्सा सेवाओं को प्रभावित कर सकता है। लेकिन जनहित की दृष्टि से एक और बात स्पष्ट रहनी चाहिए—डॉक्टरों की सुरक्षा और मरीजों के अधिकार एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं।मरीज को उचित इलाज, सही जानकारी, सम्मानजनक व्यवहार और शिकायत होने पर निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार मिलना चाहिए। वहीं डॉक्टर को भी बिना अनुचित दबाव और हिंसा के अपना पेशेवर दायित्व निभाने का अवसर मिलना चाहिए। स्वास्थ्य व्यवस्था पर जनता का भरोसा तभी मजबूत होगा, जब सुरक्षा, जवाबदेही और पारदर्शिता साथ-साथ चलें।
▪️IMA भवन… संगठन की उपलब्धि या भविष्य की जिम्मेदारी?
रिपोर्ट में IMA भवन के भूमिपूजन और उसके निर्माण के लिए विधायक शैलेंद्र जैन की ओर से 25 लाख रुपये के योगदान का भी उल्लेख है। किसी चिकित्सा संगठन के लिए अपना भवन होना बैठकों, प्रशिक्षण और शैक्षणिक गतिविधियों के आयोजन के लिहाज से उपयोगी हो सकता है।लेकिन जनहित के नजरिए से यह सवाल भी जरूरी है कि इस भवन का उपयोग भविष्य में चिकित्सा शिक्षा, डॉक्टरों के प्रशिक्षण और सामुदायिक स्वास्थ्य गतिविधियों के लिए किस तरह किया जाएगा। अगर यहां नियमित प्रशिक्षण, जनजागरूकता और आपातकालीन सहायता से संबंधित कार्यक्रम आयोजित होते हैं, तो इसका लाभ व्यापक स्तर पर मिल सकता है।
▪️उपलब्धियों का असली पैमाना क्या होना चाहिए?
IMA सागर की 2025-26 की रिपोर्ट में गतिविधियों की व्यापक सूची दिखाई देती है। कैंसर से लेकर टीबी तक, रक्तदान से लेकर CPR तक और चिकित्सा उपकरणों से लेकर डॉक्टरों के अधिकारों तक—कई क्षेत्रों में काम दर्ज है।लेकिन किसी भी स्वास्थ्य संगठन की सफलता का अंतिम पैमाना सिर्फ यह नहीं होना चाहिए कि कितने कार्यक्रम आयोजित हुए। असली पैमाना यह होना चाहिए कि कितने लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचीं? कितने मरीजों की बीमारी की समय रहते पहचान हुई? कितने जरूरतमंदों को आगे का इलाज मिला? कितने लोगों ने CPR का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया? और अस्पतालों को दिए गए उपकरणों से मरीजों को क्या लाभ मिला?
इन सवालों के जवाब के लिए लाभार्थियों की संख्या, जांच के नतीजों, फॉलोअप और चिकित्सा सुविधाओं में आए बदलाव के आंकड़े सामने आना जरूरी है।
कुल मिलाकर, IMA सागर की गतिविधियां चिकित्सा संगठन की भूमिका को केवल डॉक्टरों के पेशेवर हितों तक सीमित नहीं रखतीं। रिपोर्ट में सामुदायिक स्वास्थ्य, बीमारी की रोकथाम, आपातकालीन प्रशिक्षण और चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने के प्रयास दर्ज हैं। अब जरूरत है इन प्रयासों के परिणामों को भी जनता के सामने लाने की। क्योंकि स्वास्थ्य के क्षेत्र में असली उपलब्धि वह नहीं, जो सिर्फ रिपोर्ट के पन्नों पर दिखाई दे… असली उपलब्धि वह है, जिसका लाभ किसी जरूरतमंद मरीज तक पहुंचे।
















