सागर, 31 अगस्त।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), सागर और इंडियन सोसायटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स (आईएसए), सागर के संयुक्त तत्वावधान में आयुष्मान आरोग्य मंदिर, पटना बुजुर्ग, रहली में टीबी जांच एवं जागरूकता शिविर और सीपीआर का मेगा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण लोगों को उनके नजदीक उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी देना, टीबी के लक्षणों और समय पर जांच के बारे में जागरूक करना तथा आपात स्थिति में किसी की जान बचाने के लिए सीपीआर का प्रशिक्षण देना था।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर से गांव में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा
आईएमए सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को घर के पास स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि सागर जिले में 247 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हैं। यहां मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के साथ मधुमेह और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों की जांच, आवश्यक दवाओं का निःशुल्क वितरण और टेली-परामर्श की सुविधा भी उपलब्ध है।
टीबी के लक्षणों को नजरअंदाज न करें
डॉ. साद ने कहा कि लंबे समय से खांसी, बुखार, वजन कम होना, रात में पसीना आना और भूख कम लगना जैसे लक्षण होने पर टीबी की जांच जरूर करानी चाहिए। समय पर जांच और इलाज से टीबी को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है और संक्रमण को फैलने से भी रोका जा सकता है।
उन्होंने बताया कि सक्रिय टीबी के लक्षण नहीं होने पर भी कुछ लोगों में लेटेंट टीबी संक्रमण हो सकता है। ऐसे मामलों की पहचान के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में Cy-TB जांच निःशुल्क उपलब्ध है। पात्र लोगों में समय पर निवारक उपचार से आगे चलकर सक्रिय टीबी होने का खतरा काफी कम किया जा सकता है।
47 लोगों की जांच, 3 में टीबी के संभावित लक्षण
शिविर में 47 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई। इसमें रक्त जांच, बलगम की जांच और पोर्टेबल डिजिटल एक्स-रे की सुविधा का उपयोग किया गया।
जांच के दौरान 3 लोगों में टीबी के संभावित लक्षण पाए गए। उन्हें आगे की जांच और उपचार के लिए चिन्हित किया गया। वहीं 2 नए मधुमेह रोगियों की भी पहचान हुई और उन्हें आवश्यक परामर्श दिया गया।
मैनिकिन पर सीखा सीपीआर
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण मैनिकिन आधारित सीपीआर प्रशिक्षण रहा। मुख्य प्रशिक्षक डॉ. अजय सिंह ने प्रतिभागियों को अचानक हृदय रुकने की स्थिति में सीपीआर देने की सही तकनीक का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया।
उन्होंने मैनिकिन पर सीपीआर करके दिखाया और बताया कि कार्डियक अरेस्ट के बाद शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। सही समय पर शुरू किया गया सीपीआर मस्तिष्क और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों तक रक्त पहुंचाने में मदद करता है और जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
आईएमए अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने कहा, “टीबी की समय पर पहचान और सीपीआर का सही ज्ञान—दोनों ही ऐसी जानकारियां हैं, जो जरूरत के समय किसी की जिंदगी बचा सकती हैं।”
कार्यक्रम में जिला क्षय अधिकारी डॉ. आरिफ कुरैशी, डॉ. अभय, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी रविकांत अहीरवार, एएनएम रजनी, पिरामल स्वास्थ्य से आयुषी शुक्ला तथा स्थानीय नागरिकों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
आईएमए और आईएसए सागर ने बताया कि यह कार्यक्रम जनस्वास्थ्य जागरूकता अभियान का हिस्सा है। भविष्य में भी गांवों, स्कूलों, कॉलेजों, सार्वजनिक स्थानों और कार्यालयों में टीबी जागरूकता एवं सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हों और आपात स्थिति में जीवन बचाने में सक्षम बन सकें।
















