प्रज्ञा से निकलेगा वैश्विक समाधान

“आज पूरा विश्व इन्फर्मेशन सोसाइटी और नॉलेज सोसाइटी की बात कर रहा है. समूचा संसार वर्तमान में संसूचना एवं ज्ञान को ही शक्ति, ऊर्जा, उत्पादन, समृद्धि का आधार मानकर चल रहा है. किन्तु भारतीय ज्ञान परम्परा में प्रज्ञा को इनसे से भी ऊपर और महत्वपूर्ण माना गया है. इसके लिए हमको “विसडम सोसायटी” (प्रज्ञा समाज) को समझने और स्वीकार करने की जरूरत है.” ये विचार दिये प्रो दिवाकर सिंह राजपूत ने.

डॉ हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर में डॉयरेक्टर अकादमिक अफेयर्स और मानविकी समाज विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो दिवाकर सिंह राजपूत ने कानपुर में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में विषय प्रवर्तक के रूप में उद्बोधन देते हुए ‘प्रज्ञा समाज’ (विसडम सोसायटी) की नवीन अवधारणा प्रस्तुत की. प्रोफेसर राजपूत ने कहा कि डिजिटलाइजेशन एवं नॉलेज सोसाइटी के इस दौर में पूंजी और उत्पादन के लिए भ्रम की स्थिति पैदा होना स्वाभाविक है किन्तु प्रज्ञा सभी तरह की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करने में सक्षम है. इसलिये प्रज्ञा यानि विवेक को ही उत्पादन, ऊर्जा, शक्ति, समृद्धि और समग्र विकास का एक महत्वपूर्ण आधार मानना चाहिए.

पी पी एन कॉलेज कानपुर में आयोजित संगोष्ठी का मूल विषय था “डिजिटलाइजेशन, नॉलेज सोसाइटी एवं नई सामाजिक व्यवस्था”. संगोष्ठी में विषय प्रवर्तक के रूप में उद्बोधन देते हुए डॉ राजपूत पश्चिम की अवधारणाओं से ज्यादा समृद्ध है हमारे देश की ज्ञान परम्परा. जरूरत है खुद की क्षमताओं को पहचान कर आत्मविश्वास से समर्पित प्रयास करने की. कम्प्यूटरीकृत सूचनाओं की, सत्यता और सार्थकता के मूल्यांकन की, क्षमता विकसित करते हुए रचनाधर्मी प्रयास ही कल्याण की दिशा में सहयोगी हो सकते हैं. डॉ राजपूत ने ‘आई के डब्ल्यू’ और ‘आईस’ माॅडल भी प्रस्तुत किये.

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रो अनूप कुमार सिंह ने कहा कि नॉलेज सोसाइटी के विभिन्न पहलुओं पर विचार प्रस्तुत किये. डॉ सिंह ने डॉ राजपूत द्वारा प्रस्तुत नवीन अवधारणा एवं माॅडल की सराहना करते हुए उनको बधाईयाँ दी.

प्रो अरुण कुमार शर्मा ने डिजिटलाइजेशन के विभिन्न आयामों और सामाजिक प्रभाव की चर्चा की. संगोष्ठी में डॉ डी आर साहू, डॉ तेज बहादुर सिंह एवं डॉ कृष्ण कुमार ने भी संबोधित किया. कार्यक्रम का संचालन डॉ महेन्द्र ने किया. संगोष्ठी में शिक्षकों, शोधार्थियों और छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की.